ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका द्वारा हमले के बाद, तेहरान ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जवाबी हमला शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इराक और क़तर में स्थित अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमले किए गए हैं, जो इस पूरे संघर्ष के और भड़कने के संकेत दे रहे हैं।
इस लेख में हम जानेंगे कि अमेरिका ने मध्य पूर्व (Middle East) में कहां-कहां अपने प्रमुख मिलिट्री बेस बनाए हैं, वहां कौन-कौन से हथियार और विमान तैनात हैं, और क्या ये बेस किसी बड़े युद्ध के लिए तैयार हैं या नहीं।
1️⃣ तेल की सुरक्षा: अमेरिका के बेस तेल के मुख्य रूट्स जैसे होरमुज जलडमरूमध्य की निगरानी रखते हैं ताकि वैश्विक आपूर्ति बाधित न हो।
2️⃣ आतंकवाद पर नजर: मिडिल ईस्ट में फैले आतंकी संगठनों पर निगरानी और त्वरित जवाब देने के लिए ये बेस रणनीतिक रूप से तैनात हैं।
3️⃣ ईरान पर दबाव: ईरान के खिलाफ सैन्य और कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए अमेरिका आसपास मौजूद रहना चाहता है।
4️⃣ मित्र देशों की रक्षा: कुवैत, यूएई, बहरीन जैसे सहयोगी देशों की सुरक्षा में अमेरिकी बेस एक ढाल की तरह काम करते हैं।
5️⃣ रणनीतिक पकड़: यह उपस्थिति अमेरिका को पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में त्वरित सैन्य संचालन की क्षमता देती है।
🇧🇭 बहरीन – अमेरिका का नौसेना केंद्र

बहरीन में अमेरिका का U.S. Navy का Fifth Fleet और CENTCOM (Central Command) का हेडक्वार्टर मौजूद है। यह इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है क्योंकि ये Strait of Hormuz के पास स्थित है — जो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई लाइनों में से एक है।
यहां एक गहरे समुद्र वाला पोर्ट भी है, जिसमें अमेरिका के बड़े युद्धपोत जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर्स रुक सकते हैं। अमेरिका 1948 से इस बेस का इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां U.S. Coast Guard की शिप्स के साथ-साथ 4 एंटी-माइन जहाज और 2 लॉजिस्टिक सपोर्ट शिप्स तैनात हैं।
🇶🇦 क़तर – अल उदेइद एयरबेस
Al Udeid Air Base को मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा एयरबेस माना जाता है। यहां अमेरिकी वायु सेना, स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेस और CENTCOM की मुख्य इकाइयां तैनात हैं। यह बेस हर बड़े अमेरिकी ऑपरेशन का मुख्य केंद्र होता है।
यहां लगभग 10,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, जो इसे इस क्षेत्र का सबसे अधिक तैनाती वाला बेस बनाते हैं।
🇰🇼 कुवैत – अली अल सालेम एयरबेस
Ali Al Salem Air Base, इराक की सीमा से सिर्फ 35 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां U.S. Air Force की 386th Expeditionary Wing तैनात है। यह बेस एयरलिफ्ट सपोर्ट और कोएलिशन मिशनों में अहम भूमिका निभाता है।
🇸🇾 सीरिया – अल-तनफ गारिसन
सीरिया के दक्षिण में, इराक और जॉर्डन की सीमा के पास स्थित है Al-Tanf Garrison। यह एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है, जहां अमेरिका ने सालों से ISIS के खिलाफ ऑपरेशन के लिए अपनी उपस्थिति बनाए रखी है।
यहां अमेरिका ने सहयोगी बलों को ट्रेनिंग देने और ग्राउंड सपोर्ट देने का कार्य किया है।
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🇮🇶 इराक – अल असद और अल-हरिर एयरबेस
इराक में अमेरिका के कई सैन्य बेस हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
Al Asad Air Base (अल अनबर प्रांत में)
Al-Harir Air Base (इरबिल में)
यहां लगभग 2,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ये बेस न केवल सैन्य दृष्टिकोण से अहम हैं, बल्कि अमेरिका की रणनीतिक उपस्थिति को भी दर्शाते हैं।
2020 में ईरान ने अल असद एयरबेस पर मिसाइल हमला किया था, जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत के जवाब में। इसके बाद, इरबिल स्थित बेस पर भी कई बार ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा हमले किए गए।

🇦🇪 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) – अल धाफरा एयरबेस
Al Dhafra Air Base में अमेरिकी वायु सेना की 380th Expeditionary Wing मौजूद है। यहां से F-22 Raptor जैसे एडवांस फाइटर जेट और MQ-9 Reaper ड्रोन उड़ान भरते हैं।
यहां Gulf Air Warfare Center भी है, जहां एयर और मिसाइल डिफेंस की जॉइंट ट्रेनिंग होती है।
| नौसैनिक ठिकाना | देश | स्थान | उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन | बहरीन | मनामा | अमेरिकी 5वें बेड़े का मुख्यालय; कमांड और लॉजिस्टिक केंद्र |
| कैंप अरिफजान (नौसेना सुविधाओं सहित) | कुवैत | कुवैत सिटी के दक्षिण में | अमेरिकी नौसेना और सेना के लिए समर्थन और लॉजिस्टिक संचालन |
| पोर्ट ऑफ जेबेल अली (अमेरिकी नौसेना उपयोग) | यूएई | दुबई | नौसेना जहाजों के लिए नियमित डॉकिंग, पुनः आपूर्ति और विश्राम |
| अल उदैद एयर बेस (नौसेना समन्वय) | कतर | दोहा के पास | संयुक्त संचालन और नौसेना बलों के साथ समन्वय |
| नेवल सपोर्ट फैसिलिटी रेड सी | सऊदी अरब | रेड सी तट | रेड सी और अदन की खाड़ी में संचालन के लिए समर्थन |
🔎 अमेरिका की रणनीति क्या कहती है?
चाहे वो सीरिया के रेगिस्तान हों, इराक की धरती हो या UAE का आसमान — अमेरिका की सैन्य मौजूदगी यह बताती है कि यह सिर्फ एक क्षेत्र की बात नहीं है, बल्कि यह वैश्विक रणनीति का हिस्सा है।
अमेरिका सिर्फ मौजूद नहीं है — वह पूरी तैयारी और ताकत के साथ तैनात है।
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⚠️ अब ये बेस बन गए हैं टारगेट
ईरान और उसके समर्थक समूहों द्वारा हमलों से ये साफ है कि अमेरिका के ये सैन्य अड्डे अब सिर्फ “सुरक्षा के केंद्र” नहीं रहे — बल्कि ये खुद High Value Targets बन गए हैं।
आज की तनावपूर्ण स्थिति में, यहां तक कि जो सुरक्षा देने आए हैं — वो भी सुरक्षित नहीं हैं।
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मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी सिर्फ उपस्थिति नहीं — एक शक्ति, तैयारी और नियंत्रण का संकेत है। लेकिन अब सवाल यह है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ा — तो क्या ये बेस जंग के मैदान बन जाएंगे?
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