पूरी दुनिया जानती है कि ईरान एक परमाणु शक्ति देश बनना चाहता है और इसके लिए वह कई सालों से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इज़राइल इसे एक खतरा मानता है, जिस कारण उसने पहले भी ईरान पर हमला किया था और अब भी इज़राइल ने “ऑपरेशन राइजिंग लाइन” के नाम से एक नया ऑपरेशन शुरू किया है, ताकि इस खतरे से बचा जा सके। इस ऑपरेशन में इज़राइल ने ईरान की कई न्यूक्लियर साइट्स और सैन्य ठिकानों पर हमला किया है।
इज़राइल ने यह हमला लगभग 200 फाइटर जेट्स की मदद से किया है। इस हमले में ईरान के कई सैन्य कमांडर, उसके न्यूक्लियर वैज्ञानिक और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मारे गए हैं।
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3” के तहत हमला किया है, जिसमें ईरान ने इज़राइल पर कई ड्रोन और मिसाइल दागे हैं। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि इज़राइल के पास Iron Dome और David’s Sling जैसे कई डिफेंस सिस्टम हैं, जिनकी वजह से इज़राइल ने ईरान के कई हमलों को रोक दिया।
असल में बात ये है कि अमेरिका इज़राइल का बड़ा समर्थक है। इज़राइल ने यह ऑपरेशन हवा से किया है और ज़मीनी स्तर पर भी तैयारियाँ कर रहा है, और अमेरिका इज़राइल को नौसेना सुरक्षा भी दे रहा है।
अब देखिए, यह साफ है कि रूस ईरान का बड़ा समर्थक है। भले ही लड़ाई इज़राइल और ईरान के बीच हो रही है, लेकिन परोक्ष रूप से ये लड़ाई रूस और अमेरिका के बीच है। तो आज इस लेख में हम जानेंगे कि इज़राइल और ईरान की सेनाओं में कौन ज़्यादा शक्तिशाली है।
विषय सूची
- Military Strength and Budget
- Iran and Israel: Land Forces
- Iran and Israel: Air Power
- Iran and Israel: Naval Power
- Iran and Israel: Missile Power
Military Strength and Budget
सैन्य दृष्टि से देखें तो ईरान पश्चिम एशिया की सबसे बड़ी सेना रखता है। ईरान के पास लगभग 5.8 लाख सक्रिय सैनिक हैं और लगभग 3.3 लाख प्रशिक्षित रिज़र्व सैनिक हैं। ईरान के रिज़र्व सैनिक दो हिस्सों में बंटे हैं – रिवोल्यूशनरी गार्ड और टेरिटोरियल आर्मी। ईरान के पास 2.2 लाख अर्धसैनिक बल भी हैं।
अब अगर हम इज़राइल की बात करें, तो उसकी सेना में कुल 1.7 लाख सैन्यकर्मी हैं, जिसमें थलसेना, नौसेना और अर्धसैनिक बल शामिल हैं। इसके अलावा इज़राइल के पास 4.6 लाख रिज़र्व सैनिक हैं। इज़राइल के पास सिर्फ 35,000 अर्धसैनिक बल हैं।
इज़राइल की सबसे खास बात यह है कि उसके हर नागरिक को सैन्य प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है, यानी हर नागरिक एक सैनिक है।
जनसंख्या के लिहाज़ से, ईरान इज़राइल से लगभग 10 गुना बड़ा है। ईरान की आबादी लगभग 9 करोड़ है, जबकि इज़राइल की सिर्फ 90 लाख।
डिफेंस बजट की बात करें तो इज़राइल को यहां बढ़त मिलती है। जहां इज़राइल का रक्षा बजट 24 अरब अमेरिकी डॉलर है, वहीं ईरान का बजट सिर्फ 9.95 अरब डॉलर है। यानी इज़राइल का बजट ईरान से लगभग ढाई गुना अधिक है।
Iran and Israel: Land Forces
थल सेना के मामले में ईरान इज़राइल से थोड़ा आगे है। इज़राइल के पास कुल 1370 बैटल टैंक हैं जबकि ईरान के पास लगभग 2000 बैटल टैंक हैं। बख्तरबंद वाहनों की बात करें तो इज़राइल के पास सिर्फ 44,000 हैं जबकि ईरान के पास लगभग 65,000 हैं।
इज़राइल के पास सिर्फ 150 रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम हैं जबकि ईरान के पास 775 रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम हैं। सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी यूनिट्स की बात करें तो इज़राइल के पास कुल 650 हैं जबकि ईरान के पास लगभग 580 यूनिट्स हैं।
Iran and Israel: Air Power
वायुशक्ति में इज़राइल ईरान से थोड़ा आगे है। इज़राइल के पास कुल 612 विमान हैं जिनमें 241 फाइटर जेट्स, 146 हेलीकॉप्टर और लगभग 48 अटैक हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इज़राइल के पास F-15, F-16 और F-35 जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट्स हैं, जो 5वीं पीढ़ी के विमान हैं।
ईरान के पास सिर्फ 550 विमान हैं जिनमें 186 फाइटर एयरक्राफ्ट, 129 हेलीकॉप्टर और 13 अटैक हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
इज़राइल के पास एक खास सिस्टम है। इज़राइल के पास ऐसे डिफेंस सिस्टम हैं जिनमें हमेशा इज़राइली झंडा ऊँचा रहता है। इज़राइल के पास Iron Dome, David’s Sling, Arrow और Patriot जैसे मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम हैं।
Iran and Israel: Naval Power
अगर हम इज़राइल और ईरान की नौसेना शक्ति की बात करें, तो इसमें एयरक्राफ्ट कैरियर और पनडुब्बियाँ सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। इसके बाद डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट शिप्स का नंबर आता है।
ना तो इज़राइल और ना ही ईरान के पास कोई एयरक्राफ्ट कैरियर है, लेकिन पनडुब्बियों की बात करें तो इज़राइल के पास सिर्फ 5 हैं, जबकि ईरान के पास 25 पनडुब्बियाँ हैं।
इज़राइल और ईरान दोनों के पास कोई डिस्ट्रॉयर या हेलिकॉप्टर कैरियर शिप नहीं है। ईरान के पास 7 फ्रिगेट हैं जबकि इज़राइल के पास एक भी नहीं है। ईरान के पास 21 पेट्रोल वेसल्स हैं जबकि इज़राइल के पास 46 पेट्रोल वेसल्स हैं।
“भले ही ईरान आकार और सेना की संख्या में बड़ा हो, लेकिन इज़राइल की आधुनिक तकनीक, मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम और अमेरिका का साथ उसे इस युद्ध में रणनीतिक बढ़त दिलाता है।”
Iran and Israel: Missile Power
अब तक हमने ज़मीन, हवा और समुद्र की ताकत देखी। अब बात करते हैं मिसाइल शक्ति की। ईरान के पास ऐसी मिसाइलें हैं जो पूरे वेस्ट एशिया में बेजोड़ मानी जाती हैं। ईरान के पास ड्रोन, क्रूज़ मिसाइलें और ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जिनकी रेंज 2000 किलोमीटर तक है। यानी ईरान पूरे वेस्ट एशिया में किसी भी देश को निशाना बना सकता है, चाहे वो इज़राइल ही क्यों ना हो।
ईरान द्वारा बनाए गए ड्रोन रूस ने यूक्रेन युद्ध में भी इस्तेमाल किए थे। ईरान अपनी सैन्य परेड में इन ड्रोन और मिसाइलों का प्रदर्शन भी करता है।
अगर न्यूक्लियर हथियारों की बात करें तो Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) के अनुसार, इज़राइल के पास लगभग 80 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से 30 को फाइटर जेट्स से और बाकी 50 को मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों से दागा जा सकता है। वहीं ईरान के पास अब तक कोई परमाणु हथियार नहीं है।
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Conclusion
क्षेत्रफल की बात करें तो इज़राइल ईरान के मुकाबले काफी छोटा है। ईरान का कुल क्षेत्रफल 16 लाख वर्ग किलोमीटर है जबकि इज़राइल सिर्फ 22,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। ईरान की सीमा लगभग 5800 किलोमीटर है जबकि इज़राइल की सिर्फ 1068 किलोमीटर।
ईरान का समुद्री तट 2440 किलोमीटर लंबा है जबकि इज़राइल का सिर्फ 273 किलोमीटर।
इस तरह देखा जाए तो क्षेत्रफल और जनसंख्या के मामले में इज़राइल ईरान से बहुत छोटा है, लेकिन रक्षा और तकनीक के मामले में इज़राइल आगे है। आज के आधुनिक युग में इज़राइल मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियारों का उपयोग कर रहा है, जबकि ईरान के पास ऐसे कोई उन्नत सिस्टम नहीं हैं।
