एयर इंडिया की फ्लाइट जो अहमदाबाद से लंदन (यूरोप) जा रही थी, उसमें लगभग 232 यात्री और 10 क्रू मेंबर सवार थे।
अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के बाद विमान लगभग 825 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा और फिर ज़मीन पर क्रैश हो गया, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ।
यह विमान एक डॉक्टर हॉस्टल पर गिरा, जिसके कारण विमान में सवार यात्रियों और क्रू के साथ-साथ हॉस्टल में रहने वाले डॉक्टर की भी मौत हो गई।
📚 लेख की रूपरेखा:
एक बार में 14,000 किलोमीटर तक उड़ान भरने वाला विमान
Boeing 787 Dreamliner एक लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाला विश्वसनीय विमान है, जिसे खासतौर पर ऐसे ही सफ़रों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक बार में 14,000 किलोमीटर तक उड़ सकता है। यह वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट 2013 में एयर इंडिया के बेड़े में शामिल हुआ था और लगभग 11 सालों से सेवा दे रहा था।
इस विमान की अधिकतम सेवा अवधि लगभग 40,000 उड़ान घंटे होती है, जिसे पूरा करने में 30 से 50 साल लगते हैं।
📰 हाल की महत्वपूर्ण अपडेट्स:
- Air India का Dreamliner: अहमदाबाद से लंदन जा रहा Boeing 787 टेक-ऑफ के कुछ ही मिनटों बाद क्रैश हो गया।
- ब्लैक बॉक्स की तलाश: जांच एजेंसियां मलबे से ब्लैक बॉक्स निकालने में जुटी हैं ताकि हादसे की असली वजह पता चल सके।
- डॉक्टर्स हॉस्टल में गिरा विमान: प्लेन एक हॉस्टल पर गिरा जिससे ज़मीन पर भी कई लोगों की मौत हुई।
- DGCA और NTSB की संयुक्त जांच: भारत और अमेरिका की एविएशन एजेंसियों ने मिलकर जांच शुरू कर दी है।
- फ्लाइट रिकॉर्डिंग 72 घंटे में जारी होगी: संभावित कारण जानने के लिए रिकॉर्डिंग डेटा का एनालिसिस किया जा रहा है।
Boeing 787 Dreamliner की कीमत और विशेषताएं
इस विमान की कीमत करीब 2055 करोड़ रुपये है। यह इसका बेस मॉडल है, जिसमें लगभग 248 यात्री सफर कर सकते हैं। इसकी रेंज करीब 13,529 किलोमीटर है।
लंबाई: 56.7 मीटर
विंगस्पैन (पंखों की चौड़ाई): 60 मीटर
ऊंचाई: 16.9 मीटर
फ्यूल कैपेसिटी: 1,26,206 लीटर
अधिकतम गति: 954 किमी/घंटा
इस विमान की सबसे बड़ी खासियत है कि यह हल्का होता है और ज्यादा ईंधन ले जा सकता है। इसका लगभग 50% ढांचा कंपोज़िट मटेरियल से बना होता है जिससे यह हल्का होता है और संचालन में सहायक होता है।
करीब 250 सीटों वाला यह विमान 9800 मील तक उड़ान भर सकता है।
क्रैश का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं
अब तक इस विमान हादसे के पीछे का कारण सामने नहीं आया है।
कुछ एविएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, विमान में एक खास डिवाइस होता है जिसे ब्लैक बॉक्स कहा जाता है। यह उड़ान से जुड़ा हर डेटा रिकॉर्ड करता है जिससे हादसे की वजह का पता चलता है।
तो आइए अब जानें कि ब्लैक बॉक्स क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
🧩 प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की 5 प्रमुख बातें:
- इंजन दोनों बंद: टेकऑफ़ के तुरंत बाद ईंधन बंद स्विच “RUN” से “CUTOFF” पोज़िशन में चले गए, जिससे दोनों इंजन बंद हो गए 1।
- पायलटों में कंफ्यूज़न: ब्लैक बॉक्स की रिकॉर्डिंग में एक पायलट ने पूछा, “तुमने क्यों बंद किया?”, जबकि दूसरा जवाब देता है कि उसने ऐसा नहीं किया 2।
- कुछ सेकंड में पावर खोई: स्विच बदलाव के 1–3 सेकंड के भीतर ही विमान ऊँचाई खोकर क्रैश हो गया 3।
- यांत्रिक या मानव त्रुटि? स्विच को नापसंद ढंग से बंद करना “बहुत असामान्य” है—इसमें यांत्रिक दोष, मानव चूक या कॉम्बिनेशन की संभावना दिखाई दे रही है 4।
- साज़िश या पक्षपात की संभावना नहीं: जांच में बर्ड स्ट्राइक, सैबीटाज या अन्य बाहरी कारणों का कोई संकेत नहीं मिला 5।
ब्लैक बॉक्स क्या होता है?
NTSB (National Transport Safety Board) के अनुसार, हर विमान के कॉकपिट में एक डिवाइस होती है जो पायलट और एटीसी के बीच की बातचीत, विमान के अंदर हो रही गतिविधियां, इंजन की आवाज़ और कॉकपिट की ध्वनियों को रिकॉर्ड करती है – इसे ब्लैक बॉक्स कहा जाता है।
ब्लैक बॉक्स में दो मुख्य डिवाइस होती हैं:
- Cockpit Voice Recorder (CVR) – यह पायलट की आवाज़, रेडियो ट्रांसमिशन, इंजन की आवाज़ और एटीसी से बातचीत को रिकॉर्ड करता है।
- Flight Data Recorder (FDR) – यह विमान की गति, ऊंचाई और उड़ान के अन्य लगभग 88 पैमानों को मॉनिटर करता है। इसमें धुएं की जानकारी और विमान के पंखों की स्थिति भी शामिल होती है।
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर में करीब 25 घंटे की उड़ान से जुड़ी जानकारी होती है, जो हादसे से पहले के पल रिकॉर्ड करती है और जांच में काफी मदद करती है।
क्या ब्लैक बॉक्स काला होता है?
यह साफ़ कर देना ज़रूरी है कि ब्लैक बॉक्स ना तो काला होता है और ना ही किसी काले रंग की सामग्री से बना होता है।
असल में यह नारंगी या पीले रंग का होता है ताकि विमान के मलबे में इसे आसानी से ढूंढा जा सके।
ब्लैक बॉक्स किससे बना होता है?
ब्लैक बॉक्स स्टील और टाइटेनियम जैसे मज़बूत मटेरियल से बना होता है जो बेहद गर्मी या ठंड में भी खराब नहीं होता। इसे आमतौर पर विमान के पिछले हिस्से में लगाया जाता है ताकि क्रैश में इसे कम से कम नुकसान पहुंचे।
यह चार मुख्य हिस्सों से बना होता है:
- इंटरफेस यूनिट – रिकॉर्डिंग और प्लेबैक के लिए
- लोकेटर बीकन – जिससे ब्लैक बॉक्स का पता लगाया जा सके
- सर्वाइवल मेमोरी यूनिट – जो 3400G तक की ताकत सह सकती है
- रिकॉर्डिंग चिप – जो सारा डेटा स्टोर करती है
विमान हादसों के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
आज के आधुनिक विमानों में फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम लगे होते हैं जो खुद की निगरानी करते हैं और पायलट को संभावित गलतियों के लिए सचेत करते हैं।
इन सबके बावजूद हादसे हो सकते हैं, और इनके पांच प्रमुख कारण माने जाते हैं:
- पायलट की गलती
- तकनीकी खराबी
- मौसम खराब होना
- साजिश या जानबूझकर की गई छेड़छाड़
- मानव त्रुटि (ह्यूमन एरर)
इसके अलावा भी कुछ संभावनाएं हो सकती हैं:
ATC द्वारा गलत निर्देश दिए जाना
फ्लाइट इंजीनियर द्वारा ठीक से मरम्मत ना करना
ग्राउंड स्टाफ द्वारा फ्यूलिंग या कार्गो लोडिंग में गलती होना
निष्कर्ष:
जब कोई विमान हादसा होता है, तो ब्लैक बॉक्स सबसे महत्वपूर्ण सुराग होता है, जिससे उड़ान की अंतिम जानकारी मिलती है और जांच एजेंसियां सटीक निष्कर्ष पर पहुंच पाती हैं। Air India के इस हादसे की सच्चाई भी अब इसी ब्लैक बॉक्स के जरिए सामने आ सकती है।
