क्या भारत तीन मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार है?

22 अप्रैल 2025 को, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमला हुआ, तब भारत ने इस हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।

भारत ने पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में सक्रिय आतंकियों पर हवाई हमला किया। यह हमला सीधे पाकिस्तानी राज्य पर नहीं, बल्कि केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस एयरस्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया।

भारत को तीन मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि:

1️⃣ पाकिस्तान से आतंकवाद का खतरा लगातार बना रहता है।
2️⃣ चीन की रणनीतिक विस्तारवाद नीति सीमाओं पर तनाव बढ़ा रही है।
3️⃣ बांग्लादेश की ओर से आंतरिक अस्थिरता और बाहरी समर्थन के संकेत मिल रहे हैं।

“शांति की इच्छा रखो, लेकिन युद्ध के लिए ताकत और रणनीति तैयार रखो।”

यह स्थिति एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है: जब भारत पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है, तो क्या चीन और बांग्लादेश की ओर से एक साथ आक्रमण का खतरा बढ़ जाता है? और अगर हां, तो क्या भारत तीन मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार है?

जैसे-जैसे भारत वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है, देश के पूर्वोत्तर हिस्से पर भी खतरे बढ़ते जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बांग्लादेश और चीन से भारत के पूर्वोत्तर में सुरक्षा खतरों को लेकर चिंता जताई गई थी।

अगर भारत को तीन मोर्चों पर एक साथ युद्ध लड़ना पड़े, तो इन 5 क्षेत्रों में मज़बूती ज़रूरी होगी:

सैन्य तैनाती: पश्चिम, उत्तर और पूर्वोत्तर सीमाओं पर तेज़ और लचीली फोर्स
आर्थिक शक्ति: दीर्घकालिक युद्ध के लिए टिकाऊ फंडिंग और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग
कूटनीति: रूस, अमेरिका, फ्रांस जैसे देशों के साथ सक्रिय और संतुलित संबंध
साइबर वॉरफेयर: AI, ड्रोन, डेटा सुरक्षा और सूचना युद्ध में क्षमता
आंतरिक एकता: देश के भीतर सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रवाद की भावना

“युद्ध मैदान में नहीं, तैयारी के स्तर पर जीते जाते हैं।”

बांग्लादेश सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल रहमान, जो वहां की प्रधानमंत्री के करीबी माने जाते हैं, ने हाल ही में दावा किया कि अगर भारत पाकिस्तान पर सैन्य हमला करता है, तो बांग्लादेश चीन के साथ मिलकर भारत के पूर्वोत्तर हिस्से पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है।

कई रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत पाकिस्तान से युद्ध लड़ने की सैन्य क्षमता रखता है, लेकिन उसे चीन और बांग्लादेश के साथ संभावित टकरावों को कूटनीति के जरिए संभालना चाहिए।

भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल नवाने ने कहा कि अगर भारत को तीन मोर्चों पर युद्ध लड़ना है, तो उसे सिर्फ सैन्य ताकत नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, खुफिया तंत्र और वैश्विक कूटनीति को भी मज़बूत करना होगा।


भारत तीन मोर्चों वाले युद्ध से कैसे बच सकता है?

यह पहली बार नहीं है जब भारत को तीन मोर्चों पर युद्ध की संभावना का सामना करना पड़ा है। 1965 के भारत-पाक युद्ध और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भी भारत ने चीन और अमेरिका के साथ सीधे टकराव से बचने के लिए समझदारी से कूटनीति अपनाई थी।

हालाँकि भारत 1962 में चीन से युद्ध हार गया था, लेकिन 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान भारत ने चीन के साथ तनाव बढ़ने से बचते हुए अपना ध्यान केवल पाकिस्तान पर केंद्रित रखा। इस कूटनीतिक सोच ने भारत को एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध से बचाया।

1966 में सोवियत संघ की मध्यस्थता से ताशकंद समझौता हुआ, जिससे युद्ध खत्म हुआ और क्षेत्र में तनाव कम हुआ। इसी तरह, 1971 में जब अमेरिका ने पाकिस्तान के समर्थन में एक परमाणु विमानवाहक पोत भेजा, तब भारत पहले से ही सोवियत संघ के साथ संधि कर चुका था। इसके जवाब में रूस ने बंगाल की खाड़ी में अपनी सेनाएं तैनात कर दीं, जिससे अमेरिकी हस्तक्षेप रुक गया और क्षेत्र में स्थिरता बनी रही।

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क्या भारत तीन मोर्चों पर युद्ध लड़ सकता है?

कुछ भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तीन मोर्चों पर युद्ध कठिन जरूर होगा, लेकिन असंभव नहीं। भारत के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसकी सेनाएं लगातार मल्टी-फ्रंट युद्ध की तैयारी में रहती हैं और ऐसे आपातकालीन हालात से निपटने के लिए सक्षम हैं।

भारत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करता है, लेकिन उसकी संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता को कोई भी खतरा हुआ, तो उसका जवाब बेहद सख्ती और दृढ़ता से दिया जाएगा। स्ट्राइक वन कॉर्प्स जैसे सामरिक तैनाती वाले बल, जो मथुरा में स्थित है और 1965 तथा 1971 के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभा चुका है, भारत के पूर्वोत्तर सीमाओं की सुरक्षा में आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


निष्कर्ष

पूर्व रक्षा सचिव राधाकृष्ण माथुर के अनुसार, आज का युद्ध केवल पारंपरिक सैन्य टकराव नहीं, बल्कि पांचवीं पीढ़ी का युद्ध (Fifth Generation Warfare) है, जिसमें साइबर अटैक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मनोवैज्ञानिक हमले और फेक न्यूज जैसे हथियार शामिल हैं।

भारत पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष के लिए अच्छी तरह तैयार है, लेकिन चीन के साथ एक साथ किसी अन्य मोर्चे पर युद्ध ज्यादा बड़ा खतरा साबित हो सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि भारत अपनी रक्षा प्रणाली में साइबर क्षमताएं, ड्रोन तकनीक और एआई आधारित हथियारों को शामिल करे।

आज की अनिश्चित दुनिया में, चाहे दुश्मन कमजोर क्यों न हो, तैयार रहना ही समझदारी है। जैसा कहा जाता है:
“शांति की आशा करो, लेकिन युद्ध के लिए तैयारी रखो।”

अरुण त्रिपाठी

अरुण MyNews98.com के संस्थापक हैं। वे अंतरिक्ष, रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर सरल भाषा में गहरी जानकारी प्रस्तुत करते हैं।

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