कुछ दिनों पहले एक बहुत बड़ी घटना घटी है। रूस और चीन ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत दोनों देश मिलकर चंद्रमा पर एक न्यूक्लियर पावर स्टेशन बनाएंगे।
अमेरिका ने इस समझौते को सीधी सैन्य चुनौती के रूप में देखा है, और इसी कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए डिफेंस सिस्टम की घोषणा की है, जो अंतरिक्ष से आने वाली मिसाइलों को भी रोकने में सक्षम होगा। इस सिस्टम का नाम Golden Dome Defense System रखा गया है।
💵 कितना खर्च होगा इस प्रोजेक्ट पर?
इस रक्षा प्रणाली को बनाने में अमेरिका को लगभग 175 अरब डॉलर खर्च करने होंगे, और इसे 2029 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
कनाडा ने इस प्रोजेक्ट को समर्थन दिया है और अमेरिका के साथ संयुक्त उत्पादन पर चर्चा भी कर रहा है।
Golden Dome डिफेंस सिस्टम क्या है?
जिस तरह इज़रायल के पास Iron Dome सिस्टम है, जो 2011 से शॉर्ट-रेंज मिसाइल और रॉकेट से रक्षा कर रहा है — उसी तरह Golden Dome भी एक एडवांस सिस्टम होगा जो अमेरिका को वाइड रेंज मिसाइल खतरों से बचाएगा।
यह सिस्टम अंतरिक्ष में तैनात होगा और अमेरिका को वैश्विक सैन्य स्तर पर एक नई ऊँचाई देगा। यह दुनिया का पहला ऐसा सिस्टम होगा जो पूरी तरह से स्पेस-आधारित डिफेंस प्रदान करेगा।
🛰️ Golden Dome के कुछ खास फीचर्स
- यह सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज़ मिसाइल, हाइपरसोनिक मिसाइल, सुपर मिसाइल, ड्रोन और परमाणु हमलों को रोकने में सक्षम होगा।
- यह सिर्फ ज़मीन पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष स्तर पर भी सुरक्षा देगा।
- यह सिस्टम मिसाइल को ट्रैक, डिटेक्ट और उड़ान के बीच ही नष्ट कर सकेगा।
- यह प्रक्षेपण से पहले, उड़ान के दौरान और अंतिम चरण में भी हमले को नष्ट करने की क्षमता रखेगा।
- यह किसी भी कोने से दागी गई मिसाइल या स्पेस से लॉन्च हुई मिसाइल को रोकने में सक्षम होगा।
- इसमें ऐसी अगली पीढ़ी की तकनीक लगेगी जो स्पेस में भी सेंसर और इंटरसेप्शन का काम कर सके।
🚀 इसका मकसद क्या है?
Golden Dome सिस्टम का मकसद अमेरिका को चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से आने वाले खतरों से बचाना है।
यह सिस्टम मल्टी लेयर सुरक्षा के साथ ग्राउंड-बेस्ड डिफेंस सिस्टम्स से भी जोड़ा जाएगा ताकि एक साथ कई टारगेट को इंटरसेप्ट किया जा सके।
💰 अब तक कितना निवेश हुआ है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रोजेक्ट के लिए अभी तक 25 अरब डॉलर की फंडिंग दी है। लेकिन अनुमान है कि इसे पूरी तरह से तैयार करने में 175 अरब डॉलर तक का खर्च आएगा।
यह प्रोजेक्ट कब तक तैयार होगा?
ट्रंप के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को 2029 से पहले ऑपरेशनल कर देना है। लेकिन इस पर आने वाला भारी खर्च और अत्याधुनिक तकनीकें इस मिशन को चुनौतीपूर्ण भी बनाती हैं।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक कॉन्सेप्ट (परिकल्पना) है और अभी तक व्यवहारिक नहीं है। अमेरिका इस सिस्टम की ज़रूरतों, आर्किटेक्चर और डिज़ाइन पर चर्चा कर रहा है।
कौन-कौन सी कंपनियां बना रही हैं Golden Dome?
🛰️ प्रमुख कंपनियां जो इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं:
SpaceX: यह टेस्ला की एयरोस्पेस कंपनी है जो इस प्रोजेक्ट में सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करेगी।
Palantir Technologies: डेटा एनालिसिस में एक्सपर्ट, जो सिस्टम की मॉनिटरिंग और रियल टाइम रिस्पॉन्स में भूमिका निभाएगी।
Anduril Industries: यह कंपनी डिफेंस टेक्नोलॉजी में माहिर है और इंटरसेप्शन सिस्टम डेवेलप करेगी।
Lockheed Martin और RTX Corporation: ये कंपनियां मिसाइल डिफेंस सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों को बनाएंगी और उन्हें इंटीग्रेट करेंगी।

चीन और रूस इस प्रोजेक्ट से चिंतित क्यों हैं?
चीन ने इस प्रोजेक्ट को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि यह रक्षा प्रणाली जमीनी संघर्ष को ही नहीं, बल्कि स्पेस में भी हथियारों की दौड़ को बढ़ावा देगी।
चीनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की प्रणाली का निर्माण कूटनीतिक स्तर पर वैश्विक संतुलन को बिगाड़ सकता है।
रूस और अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े परमाणु संपन्न देश हैं। उनके बीच 1972 का Anti-Ballistic Missile Treaty और 1987 का Intermediate Range Nuclear Forces Treaty जैसे समझौते अब खत्म हो चुके हैं।
रूस का कहना है कि अमेरिका द्वारा शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट भविष्य में न्यूक्लियर वॉर रेस को जन्म दे सकता है।
अमेरिका ने इन दोनों समझौतों से क्रमशः 2002 और 2019 में बाहर निकलने का निर्णय लिया था।
निष्कर्ष:
Golden Dome एक ऐसा रक्षा प्रोजेक्ट है जो भविष्य में अमेरिका को स्पेस से आने वाले किसी भी प्रकार के हमलों से बचाने में सक्षम हो सकता है। हालांकि इसकी लागत और तकनीक इसे चुनौतीपूर्ण बनाती है, लेकिन अगर यह सफल होता है तो यह दुनिया की सबसे एडवांस्ड डिफेंस शील्ड बन सकता है।
